महिलाएं मंदिर में नहीं जाती थीं, जगह-जगह लिखा- वे पवित्र हैं, उनका प्रवेश निषेध नहीं
मनोज प्रियदर्शी, सूरत. केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल तक की उम्र की महिलाओं के जाने को लेकर घमासान छिड़ा हुआ है, लेकिन गुजरात के डांग जिले में माता शबरी का ऐसा मंदिर है, जहां महिलाओं को प्रवेश कराने के लिए बाकायदा बोर्ड लगाए गए हैं। वह भी 1-2 नहीं, 20 से ज्यादा बोर्ड।
यह मंदिर सूरत से करीब 140 किमी दूर सुबीर गांव में है। नाम है शबरी धाम। यह वही शबरी हैं, जिनका उल्लेख रामायण में है। मान्यता है कि इसी जगह माता शबरी ने भगवान राम को अपने जूठे बैर खिलाए थे। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही जगह-जगह महिलाओं को पवित्र बताने और उनके प्रवेश पर किसी तरह के रोक नहीं होने के बोर्ड देखे जा सकते हैं।
एक बोर्ड नहीं दिखा तो जगह-जगह लगाए : मंदिर प्रशासन ने सबसे पहला बोर्ड चार साल पहले लगाया। लेकिन कई महिलाएं इसे देखने से चूक जाती थीं। इसलिए एक साल पहले मंदिर प्रवेश के रास्ते, पार्किंग, गार्डन और अन्य जगहों पर भी बोर्ड लगा दिए गए। इसका सकारात्मक असर भी हुआ। शबरी धाम करीब साढ़े चार एकड़ में फैला हुआ है। यहां शबरी मंदिर के साथ ही पंपेश्वर महादेव और बजरंग बली का मंदिर भी है।
माता के मंदिर से माताएं ही दूर थीं : शबरी माता सेवा समिति के उपाध्यक्ष विरलभाई चौधरी बताते हैं कि कई महिलाएं मंदिर के पास आकर बाहर खड़ी हो जाती थीं। वे मंदिर की सीढ़ियां चढ़कर पूजा करने के लिए अंदर तक नहीं जाती थीं। महिलाएं मातृ शक्ति और मां स्वरूप होती हैं। ये मंदिर भी माता शबरी का है। इसलिए हर उम्र की महिलाओं को माता का दर्शन और पूजा करनी ही चाहिए। ये सोचकर मंदिर प्रशासन ने बोर्ड लगाकर ऐसी महिलाओं को जागरूक करने का निर्णय लिया।
अब महिलाएं ही महिलाओं काे कर रहीं जागरूक : इसका असर भी हुआ। कभी बाहर खड़ी रहने वाली कई महिलाएं अब न सिर्फ मंदिर के अंदर तक आती हैं, बल्कि बोर्ड दिखाकर दूसरी महिलाओं को जागरूक भी करती हैं। सुबीर में भील समुदाय की आबादी सबसे ज्यादा है। शबरी भी भील समुदाय की थीं। इसलिए परंपरागत रूप से यहां के आदिवासी माता शबरी को ही पूजते आ रहे हैं।
यह मंदिर सूरत से करीब 140 किमी दूर सुबीर गांव में है। नाम है शबरी धाम। यह वही शबरी हैं, जिनका उल्लेख रामायण में है। मान्यता है कि इसी जगह माता शबरी ने भगवान राम को अपने जूठे बैर खिलाए थे। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही जगह-जगह महिलाओं को पवित्र बताने और उनके प्रवेश पर किसी तरह के रोक नहीं होने के बोर्ड देखे जा सकते हैं।
एक बोर्ड नहीं दिखा तो जगह-जगह लगाए : मंदिर प्रशासन ने सबसे पहला बोर्ड चार साल पहले लगाया। लेकिन कई महिलाएं इसे देखने से चूक जाती थीं। इसलिए एक साल पहले मंदिर प्रवेश के रास्ते, पार्किंग, गार्डन और अन्य जगहों पर भी बोर्ड लगा दिए गए। इसका सकारात्मक असर भी हुआ। शबरी धाम करीब साढ़े चार एकड़ में फैला हुआ है। यहां शबरी मंदिर के साथ ही पंपेश्वर महादेव और बजरंग बली का मंदिर भी है।
माता के मंदिर से माताएं ही दूर थीं : शबरी माता सेवा समिति के उपाध्यक्ष विरलभाई चौधरी बताते हैं कि कई महिलाएं मंदिर के पास आकर बाहर खड़ी हो जाती थीं। वे मंदिर की सीढ़ियां चढ़कर पूजा करने के लिए अंदर तक नहीं जाती थीं। महिलाएं मातृ शक्ति और मां स्वरूप होती हैं। ये मंदिर भी माता शबरी का है। इसलिए हर उम्र की महिलाओं को माता का दर्शन और पूजा करनी ही चाहिए। ये सोचकर मंदिर प्रशासन ने बोर्ड लगाकर ऐसी महिलाओं को जागरूक करने का निर्णय लिया।
अब महिलाएं ही महिलाओं काे कर रहीं जागरूक : इसका असर भी हुआ। कभी बाहर खड़ी रहने वाली कई महिलाएं अब न सिर्फ मंदिर के अंदर तक आती हैं, बल्कि बोर्ड दिखाकर दूसरी महिलाओं को जागरूक भी करती हैं। सुबीर में भील समुदाय की आबादी सबसे ज्यादा है। शबरी भी भील समुदाय की थीं। इसलिए परंपरागत रूप से यहां के आदिवासी माता शबरी को ही पूजते आ रहे हैं।
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